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Showing posts from May, 2020
Allah Not Allowed EatMeat अल्लाह/प्रभु ने हम मनुष्यों के खाने के लिए फलदार वृक्ष तथा बीजदार पौधे दिए हैं, मांस खाने का आदेश नहीं दिया। एक तरफ तो आप भक्ति करते हो, और दूसरी तरफ आप बेजुबान निर्दोष जानवरों की हत्या कर उनका मांस खाते हो। सभी जीव परमात्मा की प्यारी आत्मा है, तो फिर मांस खाने से परमात्मा प्राप्ति कैसे होगी? जीव हिंसा करे,प्रकट पाप सिर होय। पुनि ऐसे पाप ते, भिस्त गया ना कोय।। परमात्मा कबीर जी कहते हैं कि जींस हिंसा करने से पाप ही लगता है। ऐसा महापाप करके भिस्त (स्वर्ग) कोई नहीं गया। तो फिर हे भोले मानव फिर ऐसा महापाप क्यों करता है। मांस मछलियां खात है, सुरापान से हेत।  ते नर नरकै जाएंगे, मात पिता समेत।। परमेश्वर कबीर जी कहते हैं की जो जीव हत्या करता है,मांस खाते हैं, वह अपराधी आत्मा मृत्यु उपरांत नरक में जाएंगे, साथ ही मात-पिता भी नरक में जाएंगे। कबीर,  तिलभर मछली खायके, कोटि गऊ दे दान।  काशी करौंत ले मरे, तो भी नरक निदान।। तिल के समान भी मछली खाने वाले चाहे करोड़ो गाय दान कर लें, चाहे काशी कारोंत में सिर कटा ले वे नरक में अवश्य जाएंगे ...

Kabir is Supreme God

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Kabir is Supreme God हमारे सभी धार्मिक ग्रन्थों व शास्त्रों में उस एक प्रभु/मालिक/रब/खुदा/अल्लाह/ राम/साहेब/गोड/परमेश्वर की प्रत्यक्ष नाम लिख कर महिमा गाई है कि वह एक मालिक/प्रभु कबीर साहेब है जो सतलोक में मानव सदृश स्वरूप में आकार में रहता है।  वेद, गीता, कुरान और गुरु ग्रन्थ साहेब ये सब लगभग मिलते जुलते ही हैं। यजुर्वेद के अ. 5 के श्लोक नं. 32 में, सामवेद के संख्या नं. 1400, 822 में, अथर्ववेद के काण्ड नं. 4 के अनुवाक 1 के श्लोक नं. 7, ऋग्वेद के म. 1 अ. 1 के सुक्त 11 के श्लोक नं. 4 में कबीर नाम लिख कर बताया है कि पूर्ण ब्रह्म कबीर है जो सतलोक में आकार में रहता है। गीता जी चारों वेदों का संक्षिप्त सार है। गीता जी भी उसी सतपुरुष पूर्ण ब्रह्म कबीर की तरफ इशारा करती है। गीता जी के अ. 15 के श्लोक नं. 16.17, अ. 18 के श्लोक नं. 46, 62 अ. 8 के श्लोक नं. 8 से 10 तथा 22 में, अ. 15 के श्लोक नं. 1,2,4 में उसी पूर्ण परमात्मा की भक्ति करने का इशारा किया है। श्री गुरु ग्रन्थ साहेब पृष्ट नं. 24 पर और पृष्ट नं. 721 पर नाम लिख कर कबीर साहेब की महिमा गाई है। इसी प्रकार कुरान और बाईबल एक ...

LordKabir_In_Vedas

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LordKabir_In_Vedas पूर्ण परमात्मा कविर्देव चारों युगों में आए हैं। सृष्टी व वेदों की रचना से पूर्व भी अनामी लोक में मानव सदृश कविर्देव नाम से विद्यमान थे। कबीर परमात्मा ने फिर सतलोक की रचना की, बाद में परब्रह्म, ब्रह्म के लोकों व वेदों की रचना की इसलिए वेदों में कविर्देव का विवरण है। पूर्ण परमात्मा कविर्देव (कबीर परमेश्वर) तीसरे मुक्ति धाम अर्थात् सतलोक में रहता है। -ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 18 परमात्मा साकार है, सशरीर है और राजा के समान दर्शनीय है। - यजुर्वेद कबीर परमात्मा पाप का शत्रु है, पाप विनाशक है। यजुर्वेद 5:32 कबीर परमात्मा सम्पूर्ण शांति दायक है - यजुर्वेद अध्याय 5 मंत्र 32 जिस समय सर्व सन्त जन शास्त्र विधि त्यागकर मनमानी पूजा द्वारा भक्त समाज को मार्ग दर्शन कर रहे होते हैं। तब अपने तत्वज्ञान का संदेशवाहक बन कर स्वयं कबीर प्रभु ही आते हैं। "सर्व शक्तिमान परमेश्वर कबीर" पूर्ण परमात्मा आयु बढ़ा सकता है और कोई भी रोग को नष्ट कर सकता है। - ऋग्वेद परमात्मा का नाम कबीर (कविर देव) है। - पवित्र अथर्ववेद काण्ड 4 अनुवाक 1 मंत्र 7 पूर्ण परमात्मा कबीर सा...

सच्चा सतगुरु कौन

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सच्चा सतगुरु कौन पवित्र वेदों व गीता जी आदि पवित्र सदग्रंथों में प्रमाण मिलता है कि जब-जब धर्म की हानि होती है व अधर्म की वृद्धि होती है तब परमेश्वर स्वयं आकर या अपने परम संत यानी सच्चे सतगुरु को भेजकर सत्य ज्ञान के द्वारा धर्म की पुनर्स्थापना करता है। वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज द्वारा ही सत्य ज्ञान दिया जा रहा है। श्रीमद्भगवत गीता अध्याय 15 श्लोक 1 - 4, 16, 17 में कहा गया है जो संत इस संसार रूपी उल्टे लटके हुए वृक्ष के सभी विभाग बता देगा वह पूर्ण गुरु/सच्चा सद्गुरु है। यह तत्वज्ञान केवल संत रामपाल जी महाराज ही बता रहे हैं। यजुर्वेद अध्याय 19 मन्त्र 25 के अनुसार तत्वदर्शी संत वह होता है जो वेदों के सांकेतिक शब्दों को पूर्ण विस्तार से वर्णन करता है जिससे पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति होती है।  ऐसा केवल संत रामपाल जी महाराज ही कर रहे हैं। पूर्ण संत तीन प्रकार के मंत्रों को तीन बार में उपदेश करेगा जिसका वर्णन कबीर सागर ग्रंथ पृष्ठ 265 पर बोध सागर में मिलता है। गीता जी के अध्याय 17 श्लोक 23 व सामवेद संख्या 822 में मिलता है। संत रामपाल जी महाराज ही वह पूर्ण संत हैं जो ...

सतलोक चलना है

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सतलोक ऐसा अमर लोक है जहाँ एक हंस आत्मा के शरीर का तेज 16 सूर्यों के समान है लेकिन उसमें गर्मी नहीं है। पूर्ण परमात्मा का लोक सतलोक अमरलोक है वहां कभी किसी की मृत्यु नहीं होती। गीता अध्याय 15 के श्लोक 4 में कहा गया है कि तत्वदर्शी संत की खोज करने के बाद उस परमेश्वर के परम् पद अर्थात सतलोक की पहचान करनी चाहिए जहाँ जाने के बाद मनुष्य का जन्म मरण नहीं होता। गुरू नानक,धर्मदास जी, गरीब दास जी महाराज,घीसा दास, दादू जी सभी ने सतलोक को देखा और सतलोक में विराजमान कबीर परमात्मा को देखा है। और फिर इन महापुरुषों ने कबीर परमात्मा की कलमतोड़ महिमा लिखी। संत गरीब दास जी की वाणी में वर्णन है कि सतलोक में कितना सुख है मन तू चल रे सुख के सागर, जहाँ शब्द सिंधू रत्नागर।। जहां संखो लहर महर की उपजे, कहर नहीं जहाँ कोई। दास गरीब अचल अविनाशी, सुख का सागर सोई।। हम सभी मनुष्य व जितने भी जीव जंतु हैं पहले सतलोक में रहते थे वहाँ जन्म मरण नहीं होता है और हम कभी दुःखी नहीं होते और पूर्ण परमात्मा की भक्ति करते हैं। ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 18 में प्रमाण है कि पूर्ण परमात्मा कविर्देव तीसरे मुक्ति धाम...

AlmightyGod In TheBible

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कबीर साहेब की महिमा गाई है। इसी प्रकार कुरान और बाईबल एक ही शास्त्र समझो। दोनों लगभग एक ही संदेश देते हैं कि उस कबीर अल्लाह की महिमा ब्यान करो जिसकी शक्ति से ये सब सृष्टी चलायमान हैं। कुरान शरीफ में सूरत फूर्कानि नं. 25 की आयत नं. 52 से 59 तक में कबीरन्, खबीरा, कबीरू आदि शब्द लिख कर उसी एक कबीर अल्लाह की पाकि ब्यान की हुई है कि ऐ पैगम्बर (मुहम्मद)! उस कबीर अल्लाह की पाकि ब्यान करो जो छः दिन में अपनी शक्ति से सृष्टी रच कर सातवें दिन तख्त पर जा बिराजा अर्थात् सतलोक में जा कर विश्राम किया। इससे सिद्ध होता है कि परमेश्वर साकार है उनका नाम  अल्लाह (प्रभु) कबीर है। इसका प्रमाण बाईबल के अन्दर उत्पत्ति ग्रन्थ में सृष्टी क्रम में  बाईबल के प्रारम्भ में ही सात दिन की रचना में 1:20-2:5 में है।